About Us

Vaidic Sanskriti Kala Kendra is a living confluence of India’s ancient wisdom traditions and timeless artistic expressions. Rooted deeply in the spiritual philosophy of the Vedas, the centre stands as a sacred space where art is not merely practiced, but lived as a path of inner realization.

Indian civilization has always perceived art as a bridge between the human and the divine. Music, dance, rhythm, movement, silence, and form have never been isolated disciplines; they have been integral to spiritual growth and cultural continuity. Vaidic Sanskriti Kala Kendra carries forward this holistic vision, nurturing art as a sacred discipline (sādhanā) rather than a superficial performance.

 

Our Vision

Our Mission

Founder

पूज्य आचार्य श्री प्रसन्न जी

पूज्य आचार्य श्री प्रसन्न जी एक प्रख्यात आचार्य एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शक हैं। वे भारतीय सनातन वैदिक परंपरा, वेद- उपनिषद, योग एवं साधना के गहन अध्येता तथा साधक हैं। उनका जीवन ज्ञान, साधना और सेवा का अनुपम संगम है। आपका जन्म उत्तर प्रदेश के संभल जिला के अंतर्गत मां गंगा एवं प्रसिद्ध सिद्ध संत हरिबाबा जी के हरिबाबा बांध आश्रम के समीप गवां नामक नगर में एक ब्राह्मण कुल में हुआ। बाल्यकाल से ही उनमें आध्यात्मिक प्रवृत्ति, अनुशासन और आत्मचिंतन के संस्कार स्पष्ट रूप दिखाई देने लगे। परिवार एवं परिवेश ने उनके व्यक्तित्व को संस्कारवान दिशा प्रदान की और उनकी शिक्षा 10 वर्ष की आयु से ही वैदिक गुरुकुल एवं ऋषिकेश, वृंदावन जैसे आध्यात्मिक स्थलों पर संतों एवं गुरुजनों के सान्निध्य में संपन्न हुई। आपने वेद, वैदिक कर्मकांड, उपनिषद, भगवद्गीता, योग- दर्शन और भारतीय शास्त्रीय और भारतीय दर्शन परंपरा का गुरुजनों के सान्निध्य में रहकर गहन अभ्यास एवं अध्ययन किया। हरि, गुरुकृपा एवं सत्संग के माध्यम से उनकी साधना एवं जीवन यात्रा निरंतर अग्रसर आगे बढ़ती रही। आचार्य जी ने अपने जीवन में अभी तक विश्वशांती हेतु एवं मानव कल्याण हेतु विष्णुमहायज्ञ, रुद्रचंडी महायज्ञ, अष्टलक्ष्मी महायज्ञ, जैसे अनेकों सौ से भी अधिक महायज्ञों का संपूर्ण भारत में हजारों वैदिक ब्राम्हणों के साथ सफल आयोजन किया है एवं योगशिविर, आध्यात्मिक शिविर, वैदिक ब्राह्मणों के लिए कर्मकांड प्रशिक्षण शिविर, प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण, बाल संस्कार सभा और भारतीय कला एवं संस्कृति जैसे अनेकों विषयों पर समय – समय पर आयोजन करते रहते हैं। पूज्य आचार्य श्री प्रसन्न जी ने अनेकों वर्षों तक अपनी एकांत साधना के लिए बद्रीनाथ, गंगोत्री जैसे हिमालय के पवित्र स्थानों पर भी एकांतवास किया है। आचार्य जी पुनः भारतीय गुरुकुल शिक्षा प्रणाली से कैसे आने वाली हमारी पिढ़ी उससे जुड़े और वैदिक गुरुकलों की पुनः अधिक से अधिक संख्या में स्थापना हो उसके लिए निरंतर प्रयास रत हैं। उनका मानना है कि आध्यात्मिक चेतना, सही ज्ञान, अध्ययन, स्वाध्याय एवं साधना, के बिना समाज का वास्तविक उत्थान संभव नहीं है। वे जीवन को समरसता, करुणा, अनुशासन और आत्मबोध के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।           
                                                                                                                                             हरि:शरणम्

Become Part of Our Cultural Community

Join Vaidic Sanskriti Kala Kendra and experience the timeless beauty of Indian classical arts.